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UP Board Solutions for Class 10 Sanskrit Chapter 3 नैतिकमूल्यानि (गद्य – भारती) परिचय

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‘नयन’, ‘नीति’ और ‘न्याय’ तीनों समानार्थक शब्द हैं। इनमें अन्तर केवल इतना ही है कि ‘नयन नपुंसकलिंग है, ‘नीति’ स्त्रीलिंग और ‘न्याय’ पुंल्लिग। ये तीनों शब्द संस्कृत की ‘नी’ धातु से निष्पन्न हैं, जिसका अर्थ है–आगे बढ़ना या ले जाना। ‘नीति’ न्याय का ही दूसरा रूप है। यह समाज और व्यक्ति दोनों को ही उन्नति की ओर ले जाती है। यह धर्म से भिन्न है, लेकिन धर्म से कम कल्याण करने वाली नहीं है। इसका सम्बन्ध इसी लोक के जीवन से है। बहुत-से  ऐसे कार्य जो न तो धर्म के अन्तर्गत आते हैं और न ही न्याय की सीमा में, इनकी गणना नीति के अन्तर्गत की जाती है और इन्हें ही नैतिक मूल्य कहा जाता है। प्रस्तुत पाठ में नैतिक मूल्यों को विस्तार से समझाया गया है तथा उनका धर्म से सम्बन्ध भी बताया गया है। प्रत्येक व्यक्ति को नैतिक मूल्यों को जानकर व समझकर उनका पालन करना चाहिए।

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