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UP Board Solutions for Class 10 Sanskrit Chapter 4 भारतीय जनतन्त्रम् (गद्य – भारती) लघु उत्तरीय

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प्रश्न 1.

जनतन्त्र की विशेषता लिखिए। 

या

जनतन्त्र का महत्त्व समझाइए। 

या

जनतन्त्रको परिभाषित कीजिए। 

उत्तर :

जनता के शासन को जनतन्त्र या प्रजातन्त्र कहते हैं। इसमें प्रभुत्व-शक्ति जनता के हाथ में निहित होती है। इसमें जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि शासन करते हैं, जो जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। जो प्रतिनिधि जनता के विरुद्ध आचरण करते हैं, वे जनता के द्वारा पुनः  निर्वाचित नहीं किये जाते। इस शासन में जनहित के विपरीत कार्यों के किये जाने की सम्भावना नहीं रहती।

प्रश्न 2.

शासन-प्रणाली के कितने भेद होते हैं? स्पष्ट कीजिए। 

या

राजतन्त्र, कुलीनतन्त्र और जनतन्त्र का अन्तर बताइए।

उत्तर :

राजनीतिवेत्ताओं ने शासन-प्रणाली के निम्नलिखित तीन भेद बताये हैं

राजतन्त्र – इसमें राजा का शासन होता है।

कुलीनतन्त्र – इसमें कुलीन अर्थात् विशिष्ट लोगों का शासन होता है।

जनतन्त्र – इसमें जनता का शासन होता है।

प्रश्न 3.

जनतन्त्र का आविर्भाव सर्वप्रथम कहाँ हुआ था? भारत में राजतन्त्र से भिन्न कौन-सी शासन-प्रणाली प्रचलित थी?

उत्तर :

जनतन्त्र प्रणाली का आविर्भाव सर्वप्रथम इंग्लैण्ड में हुआ था। वहीं से यह प्रणाली विश्व के अन्य देशों में फैली। प्राचीन भारत में राजतन्त्र से कुछ भिन्न ‘गणतन्त्र’ शासन-प्रणाली प्रचलित थी। ऋग्वेद में गणतन्त्र शब्द का प्रयोग बहुत बार हुआ है। जैन और बौद्ध ग्रन्थों में भी ‘गण’ के अधीन राज्यों के उल्लेख मिलते हैं। आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) ने भी ‘अर्थशास्त्र में गणराज्यों का उल्लेख किया है। गुप्तकालीन इतिहास में हिमालय और विन्ध्याचल के मध्य अनेक गणराज्यों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 4.

राजतन्त्र क्या है?

या

राजतन्त्र किसे कहते हैं?

या

राजतन्त्र का स्वरूप बताइए। राजतन्त्र में कौन सर्वोच्च शासक होता है? 

या

राजतन्त्र के प्रमुख दोष बताइए। 

या

व्यक्ति-विशेष के शासन को क्या कहते हैं? 

या

जनता में राजतन्त्र के प्रति अरुचि क्यों उत्पन्न हुई। राजतन्त्र में राजा कैसे बनता है? 

उत्तर :

राजतन्त्र में व्यक्ति विशेष का शासन होता है, वह सर्वोच्च शासक राजा कहलाता है। वह जीवनपर्यन्त शासन करता है। उसकी मृत्यु के बाद उसका पुत्र या पुत्री (पुत्र न होने की स्थिति में) उसके पद से जनता पर शासन करते हैं। राजतन्त्र के पक्षधर विद्वान् राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि मानकर उसके उचित या अनुचित आदेश का पालन करना अनिवार्य मानते हैं। प्राचीन काल में प्रजा को सन्तान के समान मानने वाले दयालु, न्यायी और प्रजा के कल्याण के लिए राजकोष का व्यय करने वाले अनेक राजा हुए। इसके विपरीत ऐसे भी राजा हुए, जो क्रूर, कृपण, प्रजापीड़क, अपने स्वार्थ के लिए राजकोष का व्यय करने वाले और मनोनुकूल आचरण करने वाले थे। साथ ही राजतन्त्र में लोग दण्डों के भय से कार्य सम्पन्न करते थे, कर्तव्य की भावना से नहीं। ऐसे ही दोषों के कारण लोगों के मन में राजतन्त्र के प्रति अरुचि उत्पन्न हो गयी।

प्रश्न 5.

हमारे देश में कौन-सी शासन-प्रणाली प्रवर्तमान है? 

या

भारतवर्ष ने किस सन्, महीने व दिनांक को जनतन्त्र प्रणाली को स्वीकार किया था? 

उत्तर :

हमारे देश भारतवर्ष में 15 अगस्त, 1947 के बाद से जनतन्त्रात्मक शासन-प्रणाली प्रवर्तमान है।

प्रश्न 6.

राजतन्त्र और जनतन्त्र का प्रमुख अन्तर स्पष्ट कीजिए 

उत्तर :

राजतन्त्र में राजा का शासन होता है, जब कि जनतन्त्र में जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों का।  राजतन्त्र में लोग दण्ड के भय से कार्य सम्पन्न करते हैं, जब कि जनतन्त्र में कर्तव्य की भावना से कार्य सम्पन्न किया जाता है।

प्रश्न 7.

राजनीतिज्ञों ने शासन-प्रणाली के कौन-कौन से तन्त्र स्वीकार किये हैं? किसी एक तन्त्रको संक्षिप्त वर्णन प्रस्तुत कीजिए।

या

राजनीतिज्ञों/विद्वानों द्वारा शासन-तन्त्रों के कौन-कौन से भेद स्वीकृत हैं?

उत्तर :

[ संकेत प्रश्न सं० 2 और प्रश्न सं० 1 के उत्तर को लिखें।]

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