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UP Board Solutions for Class 10 Sanskrit Chapter 9 संस्कृतभाषायाः गौरवम् (गद्य – भारती) लघु उत्तटीय प्रश्न

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प्रश्न 1.

संस्कृत भाषा में निबद्ध वेदांगों की संख्या तथा नाम लिखिए।

या

वेदांगों के नाम लिखिए। 

उत्तर :

संस्कृत भाषा में निबद्ध वेदांगों की संख्या छः है। इनके नाम हैं—

• शिक्षा,

• कल्प,

• व्याकरण,

• निरुक्त,

• छन्द तथा

• ज्योतिषः

प्रश्न 2.

चार वेदों के नाम लिखिए। 

उत्तर :

चार वेदों के नाम हैं-

• ऋग्वेद,

• यजुर्वेद,

• सामवेद और

• अथर्ववेद।

प्रश्न 3.

संस्कृत भाषा का महत्त्व समझाइए। 

उत्तर :

संस्कृत भाषा विश्व की सभी भाषाओं में सबसे प्राचीन, अत्यधिक ज्ञान-विज्ञान से सम्पन्न, सरल, अत्यन्त मधुर और सभी के मन को हरने वाली है। यह बात पूर्वी (भारतीय) और पाश्चात्य विद्वानों द्वारा एक स्वर से स्वीकार की गयी है। ग्रीक, लैटिन आदि प्राचीन भाषाओं में संस्कृत  भाषा ही सबसे प्राचीन और विशाल साहित्य से युक्त है।

प्रश्न 4.

दर्शन मुख्य रूप से कितने भागों में विभक्त हैं?

उत्तर :

दर्शन मुख्य रूप से दो भागों में विभक्त हैं-

(क) आस्तिक दर्शन और

(ख) नास्तिक दर्शन। आस्तिक दर्शन के अन्तर्गत छ: दर्शन आते हैं-

• न्याय,

• वैशेषिक,

• सांख्य,

• योग,

• मीमांसा तथा

• वेदान्त।

नास्तिक दर्शन के अन्तर्गत तीन दर्शन आते हैं—

• चार्वाक,

• जैन और

• बौद्ध।

प्रश्न 5.

संस्कृत भाषा की विपुल साहित्य-राशि का संक्षेप में परिचय दीजिए।

उत्तर :

संस्कृत साहित्य में विश्व के सबसे प्राचीन ऋक्, यजुः, साम और अथर्व नाम के चार वेद; शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष-ये वेदों के छ: अंग; न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदान्त-ये छः आस्तिक दर्शन; चार्वाक, जैन, बौद्ध-ये तीन नास्तिक दर्शन; उपनिषद्, स्मृतियाँ, सूत्र, धर्मशास्त्र, पुराण, रामायण, महाभारत आदि ग्रन्थ संस्कृत साहित्य की विपुल राशि के परिचायक हैं।

प्रश्न 6.

संस्कृत साहित्य किन तीन प्रकारों में से विभाजित है? इसके कुछ प्रमुख कवियों-लेखकों के नाम बताइए। 

या

सुप्रसिद्ध संस्कृत कवियों में से पाँच के नाम लिखिए। 

या

सुप्रसिद्ध संस्कृत कवियों के नाम बताइए। 

उत्तर :

संस्कृत साहित्य-गद्य, पद्य और चम्पू-तीन प्रकारों में विभाजित है। वाल्मीकि, व्यास, भवभूति, दण्डी, सुबन्धु, बाण, कालिदास, अश्वघोष, भारवि, जयदेव, माघ, श्रीहर्ष आदि कवि और लेखक इसके गौरव को बढ़ाते हैं।

प्रश्न 7.

राजा ने लकड़हारे से किस शब्द का गलत प्रयोग किया था? सही शब्दक्या होना चाहिए था?

उत्तर :

राजा ने लकड़हारे से ‘बाधति’ क्रिया का प्रयोग किया था, जो कि परस्मैपदी होने के कारण अशुद्ध था। इसके स्थान पर क्रिया को आत्मनेपदी प्रयोग ‘बाधते’ होना चाहिए था।

प्रश्न 8.

रामायण के अनुसार हनुमान ने सीताजी से किस भाषा में बातचीत की थी? उद्धरणपूर्वक लिखिए।

उत्तर :

रामायण के अनुसार हनुमान ने सीताजी से सामान्य लोगों में प्रचलित संस्कृत भाषा में निम्नवत् विचार करते हुए बातचीत की थी–

वाचं चोदाहरिष्यामि, द्विजातिरिव संस्कृताम्।

रावणं मन्यमानां मां, सीता भीता भविष्यति ॥

प्रश्न 9.

भारतीय संस्कृति को प्रतिबिम्बित करने वाली भाषा कौन-सी है? 

उत्तर :

भारतीय संस्कृति को प्रतिबिम्बित करने वाली भाषा संस्कृत है, क्योंकि इस भाषा में  रचित सम्पूर्ण साहित्य भारतीय समाज को प्रत्यक्ष प्रतिबिम्ब प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 10.

संस्कृत भाषा के सम्बन्ध में नेहरू जी ने अपनी आत्मकथा में क्या लिखा था?

उत्तर :

पं० जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्म-कथा में संस्कृत के महत्त्व के विषय में लिखा है कि, संस्कृत भाषा»भारत की अमूल्य निधि है। उसकी सुरक्षा का दायित्व स्वतन्त्र भारत पर है।”

प्रश्न 11.

हनुमान् ने सीता को मुद्रिका देते समय सीता से संस्कृत में वार्तालाप क्यों नहीं किया? 

उत्तर :

सीता को मुद्रिका देते समय हनुमान ने उनसे ब्राह्मणों के द्वारा बोली जाने वाली संस्कृत में वार्तालाप इसलिए नहीं किया, क्योंकि उन्हें भय था कि सीता उनको रावण समझते हुए डर जाएँगी।

प्रश्न 12.

भारत की अखण्डता को बनाये रखने वाली दो सूक्तियाँ लिखिए।

उत्तर :

भारत की अखण्डता को बनाये रखने वाली दो सूक्तियाँ निम्नलिखित हैं

अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम्।

मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव।।

प्रश्न 13.

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ कथन का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :

प्रस्तुत कथन का अर्थ है-माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान् हैं। वास्तव में स्वर्ग को किसी ने देखा नहीं है कि वह है भी या नहीं और वहाँ वास्तव में परम सुख मिलता भी है अथवा नहीं । लेकिन माता

और जन्मभूमि हमारे समक्ष प्रत्यक्ष उपस्थित हैं। माता हमें जन्म देती है और अनेकानेक दुःख-कष्ट सहनकर हमें हर सम्भव सुख प्रदान करती है। इसी प्रकार हमारी मातृभूमि हमारे भरण-पोषण के लिए अन्न-जल और विविध प्रकार के धन-धान्य उपलब्ध कराकर हमें स्वर्ग का-सा सुख प्रदान करती है। इसीलिए यह कहना उचित ही है कि “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।”

प्रश्न 14.

“शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः” का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर  :

ण्डाल और कुत्ते दोनों का स्वभाव एक जैसा होता है, क्योंकि ये दोनों अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अपना पेट भरने के लिए ये अपने परिजनों, माता-पिता, पुत्र-पुत्री आदि किसी को भी मारने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसलिए विद्वान् लोग चाण्डाल और कुत्ते को एक समान दृष्टि से देखते हैं।

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