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UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 19 जब मैंने पहली पुस्तक खरीदी (मंजरी) पाठ का सार (सरंस)

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लेखक के पिता आर्य समाज, रानीमण्डी के प्रधान थे। माँ ने स्त्रियों की शिक्षा के लिए एक आदर्श कन्या पाठशाला स्थापित की थी। लेखक को बचपन में पत्र-पत्रिकाएँ पढ़ने का शौक था। उनकी प्रिय पुस्तक स्वामी दयानन्द की जीवनी की किताब थी। जिसमें स्वामी जी ने समाज की रूढ़ियों का खण्डन किया था। उन्होंने अन्त में अपने हत्यारे को क्षमा करके उसे सहारा दिया था। ये बातें लेखक के बालमन को रोमांचित करती थीं। माँ स्कूली पढ़ाई पर जोर देती थी। पाँचवें दर्जे में लेखक कक्षा में प्रथम आया। माँ की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। अँग्रेजी में सबसे अधिक नम्बर आने पर दो किताबें इनाम में मिलीं।

इन किताबों ने लेखक के लिए नई दुनिया का द्वार खोल दिया- पक्षियों से भरी आकाश और रहस्यों से भरा समुद्रा लेखक ने अपने मुहल्ले की लाइब्रेरी हरिभवन में जाना शुरू कर दिया। वह लाइब्रेरी खुलते ही वहाँ पहुँचता और बन्द होने पर अनिच्छा से उठता। इण्टर पास करने पर पाठ्यपुस्तक बेचकर बी०ए० की किताबें खरीदी और दो रुपये बच गए। उन दो रुपयों को लेकर माँ की सहमति से ‘देवदास’ फिल्म देखने गया। बुक काउन्टर पर एक पुस्तक देखी- ‘देवदास’ लेखक शरत् चन्द्र चट्टोपाध्याय,दाम केवल एक रुपया। लेखक ने दस आने में वह पुस्तक खरीद ली। माँ के पूछने पर बताया कि फिल्म नहीं देखी। उसने खरीदी हुई पुस्तक दिखाई। माँ की आँखों में आँसू आ गए। यह पुस्तक लेखक द्वारा अपने पैसों से खरीदी गई और उसकी निजी लाइब्रेरी की पहली पुस्तक थी।

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