X
Take an online test Take Now
0 votes
73 views
in Important Questions by (-750 points)
UP Board Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 16 अमोघं तद् बलिदानम्

Please log in or register to answer this question.

1 Answer

0 votes
by Expert (1.2k points)

शब्दार्था:– अवैधरूपेण = गैर कानूनी रूप से, निरसनाय = हटाने के लिए. अतिक्रमणम् = सीमा से आगे बढ़ जाना, प्रेषणम् = भेजना, स्वशौर्येण = अपने शौर्य से, शत्रुहस्तगतानि = शत्रु के हाथ में गये हुए, आत्मरक्षणे = अपनी रक्षा में, पणीकृत्य = दाँव लगा कर, आमोघम् = सफल।

जम्मू-कश्मीर राज्यस्व ………………………………वशीकृतवन्तः इति।
हिन्दी अनुवाद-जम्मू-कश्मीर राज्य के कारगिल क्षेत्र में सन् 2००० में मई मास से भारतीय सेना युद्ध कर रही थी। देश के उस भाग में (अवैध रूप में) अन्दर घुसने और अतिक्रमण करने वालों को रोकने के लिए (हमारे द्वारा) वह प्रयत्न किया जा रहा था।

भारत के इस भूभाग में ऐसा अतिक्रमण बहुत समय पहले से ही व्यवस्थित रीति से सोच-विचारकर शत्रुओं द्वारा आरम्भ था, ऐसा उस समय मालूम हुआ; जब जनवरी मास में ही भारतीय गुप्तचर विभाग द्वारा जम्मू-कश्मीर राज्य के कारगिल में स्थित सीमा में नियन्त्रण रेखा के पास पाकिस्तान का कोई विमान देखा गया था; परन्तु उस विषय में (उस समय तक) हमारे द्वारा गम्भीरता से विचार नहीं किया गया था। इसके चार महीनों बाद पता चला कि आठ सौ से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों और अफगानिस्तान के आतंकवादियों ने अतिक्रमण करके कारगिल, मष्कोह और द्रास में निर्जन पर्वत प्रदेशों पर अधिकार कर लिया।

युद्धेधे ……………………………………….. संजय कुमारः।
हिन्दी अनुवाद-युद्ध में भारतीय सैन्य बल के द्वारा अतुलनीय पराक्रम प्रदर्शित किया गया। अपने शौर्य से शत्रु द्वारा अधिकृत नौकाएँ और सैन्य-स्थल मुक्त कराये गये। कठिन परिस्थिति में और भीषण युद्ध में भारतीय सैन्य बल को विजय प्राप्त हुई। इस वीरतापूर्ण अभियान में अनेक सैनिकों ने वीरगति प्राप्त की। सैनिकों के प्राणोत्सर्ग को नमन करके वीर सैनिक ‘परमवीर चक्र से सम्मानित किये गये। ये हैं

कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय
सूबेदार योगेन्द्र सिंह यादव
कैप्टन विक्रम बत्रा
राइफल मैन संजय कुमार

शान्तिप्रियाः ………………………………………. प्रयतनीयम्।
हिन्दी अनुवाद – भारतीय शान्तिप्रिय हैं, इसमें संदेह नहीं है; परन्तु आत्म-रक्षा में हम कभी आलसी नहीं हैं। यह प्रधानमंत्री के द्वारा और दूसरों (दूसरे व्यक्तियों) के द्वारा उद्घोषित है। हम देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों को दाँव पर लगाकर (भी) कार्य करते हैं और हम सब योद्धाओं को गौरव के साथ याद करते हैं। जिस प्रकार से उनका आत्मबलिदान व्यर्थ (बेकार) न हो (हम) सभी को वैसा प्रयत्न करना चाहिए।

Related questions

Categories

...